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"अमन, समझदारी और न्याय का संदेश: कुलपति प्रो. नईमा खातून की मुलाक़ात पर एक विवेकपूर्ण दृष्टिकोण"
A.M.U TIMES
Pathan Shoeb Alig with Honorable Former Vice Chancellor Prof. Mohammad Gulrez
5/10/2025


अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एक तहरीक का नाम है, एक तहज़ीब का नाम है, एक जज़्बे का नाम है और जब इस अज़ीम इदारे की पहली मुस्लिम महिला वाइस चांसलर प्रो. डॉ. नईमा खातून मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात करती हैं, तो सवाल ये नहीं होना चाहिए कि "क्यों मुलाक़ात की?" — बल्कि सवाल ये होना चाहिए कि "क्या पैग़ाम देने गईं?"
जब एक शिक्षाविद, एक मुस्लिम खातून, एक अकादमिक लीडर अपने समुदाय और इदारे की हिफ़ाज़त के लिए व्यवस्था से मुलाक़ात करती है — तो ये गद्दारी नहीं, बल्कि बहादुरी होती है।
हमने तस्वीर देखी हमने तर्क से जवाब दिया
मैंने खुद सबसे पहले वो तस्वीर साझा की और लिखा:
"मुलाक़ात करने में कोई हर्ज़ नहीं, अगर मैडम ने मुलाक़ात की है तो सोच-समझकर ही की होगी। इस तस्वीर से ये ज़ाहिर होता है कि मैडम दोनों समुदायों के बीच अमन और मोहब्बत का पैग़ाम दे रही हैं। हम उनके साथ हैं — जब तक वो इंसाफ़ और हक़ पर हैं। लेकिन अगर बात न्याय की आई, तो सवाल मैडम से भी पूछा जाएगा।"
Vice Chancellor मैडम का क़दम – एक रणनीति, एक सफ़ाई, एक मिशन
यह कोई छुपी बात नहीं कि आज मुस्लिम यूनिवर्सिटीज़ पर निगाहें टेढ़ी हैं, बजट की बंदिशें हैं, और आइडेंटिटी पर हमले। ऐसे में अगर AMU की कुलपति मुख्यमंत्री से सीधा संवाद करती हैं, तो वह हमारे हक़ की आवाज़ पहुंचाने का ज़रिया बनती हैं।
क्या हम चाहते हैं कि AMU अलग-थलग पड़ जाए?
क्या हम चाहते हैं कि हमारे फ़ंड, हमारी नुमाइंदगी, हमारे हक़ की बातें सिर्फ़ काग़ज़ों में रह जाएं?
तो फिर क्यों नहीं समझते कि ये मुलाक़ात भी एक किस्म की 'Academic Diplomacy' है?
हम कुलपति प्रो. नईमा खातून के साथ हैं, लेकिन आंखें खुली हैं
हम उनके हर उस क़दम के साथ हैं, जो AMU को मज़बूत बनाता है, जो क़ौम की बेटियों को हिम्मत देता है, जो मज़लूम की आवाज़ को बुलंद करता है। लेकिन हां — हम आंख मूंद कर किसी के पीछे नहीं चलते।
हमारे लिए इंसाफ़ सबसे बड़ा उसूल है।
नईमा खातून: क्या भारत की अगली उपराष्ट्रपति?
क्यों नहीं?
जब एक मुस्लिम महिला, इतनी बड़ी तालीमी इदारे की अगुवाई कर सकती है, तो क्या वह भारत के संवैधानिक पदों की दावेदार नहीं हो सकतीं?
नईमा मैडम की सूझ-बूझ, शालीनता और रणनीतिक संवाद ने यह सिद्ध कर दिया कि वह सिर्फ़ एक VC नहीं, बल्कि एक राष्ट्र स्तरीय सोच की प्रतिनिधि हैं।
मेरी दूसरी पसंद? जनरल ज़मीरुद्दीन शाह साहब
अगर कभी देश को एक फौलादी, समझदार, और राष्ट्रवादी मुस्लिम चेहरा चाहिए — तो पूर्व कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल ज़मीरुद्दीन शाह साहब उसका सबसे बड़ा नाम हैं। दोनों नामों में हम अपनी उम्मीद, अख़लाक़ और नेतृत्व देखते हैं।
निष्कर्ष: मोहब्बत जोड़ो, नफ़रत तोड़ो
AMU के नौजवानों!
अब वक़्त आ गया है कि हम सिर्फ़ विरोध की राजनीति से ऊपर उठें।
मौजूदा ज़माना जज़्बात नहीं, हिकमत-ए-अमली मांगता है।
Vice Chancellor मैडम की यह पहल AMU को एक नई रणनीतिक ऊंचाई दे सकती है — बशर्ते हम उसे समझें, समर्थन दें, और न्याय की कसौटी पर साथ भी खड़े हों।"हम आलोचक हैं, दुश्मन नहीं — हम साथी हैं, अंधभक्त नहीं।"
"AMU को बचाना है, तो सोच से जोड़ो, सियासत से नहीं तोड़ो!"








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