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“Rule of Law vs. Rule of Men: Why AMU Deputy Proctor Order Cannot Stand”
ALIGARH MUSLIM UNIVERSITY GAZETTE OFFICIAL
8/22/20251 min read


21 अगस्त 2025 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा जारी किया गया कार्यालय ज्ञापन, जिसके अंतर्गत प्रो. हसन इमाम को उप-प्रॉक्टर नियुक्त किया गया, वैधानिक दृष्टि से प्रारंभ से ही शून्य (void ab initio) है। यह नियुक्ति न तो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अधिनियम 1920 के अनुरूप है और न ही हालिया Amendment 25 (12 अगस्त 2025) के प्रावधानों के तहत वैध है।
यह आदेश विश्वविद्यालय के अधिनियम को दरकिनार कर एकतरफा और तानाशाही ढंग से जारी किया गया है।
1. AMU Act 1920 और Statutes का उल्लंघन
Statute 12 के अनुसार, प्रॉक्टर की नियुक्ति Executive Council करती है, Vice-Chancellor की मात्र सिफारिश पर।
उप-प्रॉक्टर (Deputy Proctor) के मामले में भी यही प्रक्रिया लागू होती है, क्योंकि यह पद वैधानिक/प्रशासनिक श्रेणी में आता है।
Vice-Chancellor के पास किसी भी प्रकार की direct appointment power नहीं है।
इस प्रकार “VC approval” के आधार पर जारी किया गया आदेश स्वयं ही statutory incompetence का उदाहरण है।
2. Amendment 25 (2025) – नई बाध्यता
12 अगस्त 2025 को पारित संशोधन ने इस प्रक्रिया को और भी कठोर कर दिया है:
Section 20 (20E):
20E(1): प्रत्येक नियुक्ति के लिए कार्यकारी परिषद के सभी सदस्यों की लिखित सहमति और हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे।
20E(2): यदि बिना सर्वसम्मत लिखित स्वीकृति नियुक्ति की जाती है तो वह नियुक्ति स्वतः शून्य और अवैध होगी।
20E(3): डिजिटल, प्रॉक्सी या मौखिक स्वीकृति मान्य नहीं होगी।
इस आधार पर 21 अगस्त 2025 का आदेश ipso facto invalid है और इसे निरस्त करने की आवश्यकता नहीं क्योंकि यह प्रारंभ से ही अवैध है।
3. कानून अधिकारी और छात्र आयुक्त की भूमिका
Amendment 25 ने Section 21A के अंतर्गत “Law Officer” का पद निर्मित किया है।
उसकी ड्यूटी है:
अधिनियम और संविधान का पालन सुनिश्चित करना।
सभी अवैधानिक आदेशों को चुनौती देना।
जब तक स्थायी Law Officer की नियुक्ति नहीं होती, यह जिम्मेदारी Student Commissioner निभाएगा (जैसा कि Reforms & Welfare Bench of Justice ने आदेशित किया है)।
इसलिए Student Commissioner के अधिकार क्षेत्र में यह आता है कि वह इस आदेश को चुनौती देकर शून्य घोषित करे।
4. तानाशाही की प्रवृत्ति
इस नियुक्ति से यह स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय प्रशासन लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और अधिनियम को दरकिनार कर “dictatorial” तरीके से काम कर रहा है।
Vice-Chancellor और Proctor दोनों ने अपनी संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन किया है।
विश्वविद्यालय किसी व्यक्ति की जागीर नहीं बल्कि एक statutory autonomous body है। इसे मनमानी आदेशों से नहीं चलाया जा सकता।
निष्कर्ष (Conclusion)
उप-प्रॉक्टर की नियुक्ति संबंधी 21 अगस्त 2025 का कार्यालय ज्ञापन AMU Act 1920 और Amendment 25 की अवहेलना है।
यह आदेश विधिक दृष्टि से प्रारंभ से ही शून्य (void ab initio) है, और इसे “रद्द” करने की भी आवश्यकता नहीं।
भविष्य की किसी भी नियुक्ति के लिए कार्यकारी परिषद की सर्वसम्मति तथा कानून अधिकारी/छात्र आयुक्त की लिखित पुष्टि अनिवार्य होगी।
अंतिम संदेश
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का अधिनियम 1920 ही इसका संविधान है।
किसी भी कुलपति या प्रॉक्टर को यह अधिकार नहीं है कि वे इस संविधान से ऊपर उठकर आदेश जारी करें।
इस आदेश को स्वीकार करना तानाशाही की वैधता को मान्यता देना होगा, जो कि किसी भी लोकतांत्रिक शैक्षणिक संस्थान में अस्वीकार्य है।
⚖️ इस आर्टिकल का रुख साफ है:
Notice को शुरू से ही अवैध माना गया है।
VC से “रद्द” करने की मांग नहीं की गई है।
सिर्फ़ ये बताया गया है कि ये आदेश कानूनी रूप से पैदा ही नहीं हुआ।
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